होम्योपैथी में दवा चुनना सरल भी है और कठिन भी

होम्योपैथी में दवा चुनना सरल भी है और कठिन भी ।

प्रायः कई होम्योपैथ यह कहते हैं कि बहुत बार तो हमें रोग का साधरण सा हाल मालुम होते ही सटीक दवा मिल जाती है और रोगी को तत्काल राहत मिल जाती है, पर कई बार बहुत प्रयत्न करने पर भी सही दवा चुनने के लिये बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं । ऐसा क्यों होता है ? ऐसा इसलिये होता है कि तरूण रोगावस्था में तो रोग का कारण, रोग का केन्द्र, पफैलाव, दर्द का प्रकार-कैसे घटता बढ़ता है? सहकारी लक्षण, रोगी में प्राप्त लक्षणों की विचित्राता, की नोट सिम्पटम्स आदि में से थोड़े से भी लक्षण ठीक से पकड़ में आते ही सही दवा हमारे दिमाग में घूम जाती है और उसे देते ही रोगी के रोग लक्षणों में आराम आ जाता है । पर हमें समझना चाहिये कि जीर्ण रोग में हमें कापफी गहराई तक जाना होता है और रोगी भी ध्ैर्य पूर्वक, कुछ समय देकर शान्ति से चिकित्सा लेना स्वीकार करे तभी चिकित्सक रोग का सहीं ढ़ंग से उन्मूलन कर पाता है । गहराई में जाने के लिये ऊपर बताई बातों को तो ध्यान में रखना ही होगा पर इसके साथ वत्र्तमान में कौन सा मियाज्म उस पर विशेष हावी है, यह भी देखना होगा और उस मियाज्म के आधर पर एन्टी मियाज्मेटिक दवा खोजनी होगी जो रोगी के मुख्य व सर्वांगिक लक्षणों के साथ वर्तमान में प्रभावी मुख्य मियाज्म को भी कवर कर सके । इस गहराई में जाने के अलावा और कोई मार्ग हमारे पास है भी नहीं। इसके अलावा हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि रोगी को पूर्व में क्या-क्या रोग हो चुके हैं और उसके लिये कौन-कौन सी एलोपैथिक दवाएं मुख्य रूप से खिलाई गई । टाटोपैथिक तरीके से उन दवाओं के दुष्परिणामों को भी जितना हम दूर कर सकें उतना करने का प्रयत्न हमें करना चाहिये । एक बात और कि चुनी हुई दवा को किस पोटेन्सी में काम में लेना है, उसने काम किया या नहीं, दवा का एक्शन प्रकट होने की राह कब तक देखनी है और यदि काम किया पर बाद में लाभ होना रूक गया तो क्या अब दवा की शक्ति परिवत्र्तन कर या दूसरी सर्वाध्कि निकटस्थ दवा देनी होगी या ऐसी दवा खोजनी होगी जो पूर्व दवा की सहायक व अनुपूरक हो कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जिस कम्पनी की दवा अपने काम में लिए वह पर्याप्त काम न करे पर दूसरी कम्पनी की वही दवा काम कर जाये, इस सब में बड़े ध्ैर्य की जरूरत है और रोगी आपके पास कितना ठहर पाता है उसपर भी यह सब निर्भर करता है । इन छोटी-छोटी बातों को हम ध्यान में रखेंगे तो हमें निराश नहीं होना पड़ेगा और हमारी सपफलता का ग्रापफ भी बढ़ता चला जायेगा । इसके बिना कई प्रश्नवाचक रोगों में हम कुछ भी नहीं कर पायेंगे । एड्स, कैंसर ऐसे ही रोग हैं जिनसे हाथ में लेते ही बहुत से चिकित्सक तो घबरा जाते हैं और रोगी को अस्पताल में भर्ती होने की राह बतला देते हैं । गूर्दा पफेल होना, मध्ुमेह, हाटपफेल, लकवा, मिर्गी आदि कई रोग भी इसी श्रेणी में आते हैं इन रोगों में कुछ दशाओं में रोगी की सतत् निगरानी रखनी पड़ती है और इस कार्य के लिए रोगी को अपने यहाँ भर्ती कर ही, उसकी माकुल व्यवस्था की जा सकती है। ऐसा करके ही हम होम्योपैथी को एलोपैथी के स्तर की ऊँचाई तक पहुँचा पायेंगे और इम्रजेंसी में भी लोग होम्योपैथी चिकित्सा लेने को आकर्षित हो पायेंगे । इसके लिए अच्छे होम्योपैथों की टीम संगठीत होनी चाहिए ताकि सही ढ़ंग से इन्डोर अस्पताल चल सकें । कम से कम हर प्रांतों में तो ऐसा इन्डोअस्पताल खड़ा होना ही चाहिये । मेरी राय में MENTAL STATE  तो अति महत्वपूर्ण है ही, साथ ही अगर निम्न POINTS  के आधर पर से हमारी दवा निकलती है, तो निश्चित जानिये, आपकी दवाओं से ‘‘चमत्कार’’ होने वाला है।

1. How to find right smilimum for the patient

2. Analysis of the case=Totality of symptoms

3. How to Approach the Metria Medica ?

4. How to Approach the Genaral?

5. How to Approach the miasm ?

6. What is thermal ?

7. What is the basic thems of the patients ?

8. How to study met. Med. ?

9. How to take guide line from Repertory ?

10. Reading case report of the all leading Homoepathic Journals.

इति शुभम् । डा॰ अशोक गुप्ता प्रधान सम्पादक, होमियोपैथिक माइंड

Advertisements
Published in: on अक्टूबर 1, 2009 at 2:41 अपराह्न  Comments (1)  

The URI to TrackBack this entry is: https://homoeomind.wordpress.com/2009/10/01/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a4%be/trackback/

RSS feed for comments on this post.

One Commentटिप्पणी करे

  1. Dear sir,
    please clear the difference between MENTAL STATE and MENTAL SYMPTOM


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: